शुक्रवार, मार्च 12, 2010

टी.टी.के. चेन एवं डी.के. के गरम समोसे व पूड़ी


अब गरम समोसे व पूड़ी की भी ब्रांडिंग 
वाह क्या धांसू नाम है रेस्टोरेंट का 

इंग्लिश बोले तो फोकस







इंग्लिश से फोकस बनता है तभी तो लोग इंग्लिश शब्दों का प्रयोग अपने बोर्ड पर करते हैं भले ही स्पेलिंग गलत लिखने से अर्थ का अनर्थ हो.  

गुरुवार, मार्च 11, 2010

एक नज़र स्टेशनरी की स्पेलिंग पर

लखनऊ की एक किताब एवं स्टेशनरी  की दुकान के बोर्ड पर लिखी  गयी स्टेशनरी की यह  स्पेलिंग 

ये देखिये खूबसूरत करेंसी नोट


ऐसे नोट हम अपने बचपन में चूरन की पुड़िया के साथ पाते थे परन्तु कुछ देशों में ऐसी रंग बिरंगी करेंसी नोट प्रचलन में है जिसकी नक़ल करना  मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है .

रविवार, मार्च 07, 2010

इधर भी नज़र डालें


गर्मियां आ गयी हैं तो गाँव और कस्बे में कोल्ड ड्रिंक्स की सप्लाई  भी करनी है.अब गाँव कस्बे में भी मेहमानों का स्वागत पारंपरिक शरबत के बजाय पेप्सी या कोला से ही किया जाता है. गाँवों  ने अब  काफी प्रगति कर ली  है  अपने भारत में ?



और ये देखिये एक ऑटो वाले ने अपने ऑटो को हेलीकाप्टर  बना डाला है   

शनिवार, मार्च 06, 2010

बैंक ब्याज का भेदभाव अब जुलाई से हटेगा


पहले प्रस्ताव था कि 1 अप्रैल 2010 से बैंकों के सभी तरह के लोन पर बेस रेट की नई पद्धति लागू कर दी जाएगी। लेकिन बैंकों के शीर्ष अधिकारियों से राय-मशविरे के बाद रिजर्व बैक ने इसे अब 1 जुलाई 2010 से लागू करने का फैसला किया है। यह फैसला शुक्रवार को लिया गया। इस नई पद्धति के लागू होने पर अभी तक लागू बीपीएलआर (बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट) पद्धति धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। बीपीएलआर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह बैंक कर्ज के ब्याज के मामले में किसी भी तरह की बेंचमार्क नहीं रह गई है। अभी तक लगभग 74 फीसदी बैंक कर्ज बीपीएलआर ने नीचे की ब्याज दरों पर दिए गए हैं। इस पद्धति को बैंक अपने हिसाब से इस्तेमाल करते रहे हैं। जैसे, एक ही बैंक के फ्लोटिंग होम लोन पर अभी नए और पुराने ग्राहकों को अलग-अलग ब्याज देना होता है क्योंकि लोन के एग्रीमेंट में लिखा रहता है कि बीपीएलआर से कितने प्रतिशत कम पर ग्राहक से ब्याज लिया जाएगा।
मान लीजिए किसी ने जुलाई 2006 में आईसीआईसीआई बैंक से होम लोन लिया और उस समय बैंक की बीपीएलआर 9.75 फीसदी थी तो ग्राहक को इससे एक प्रतिशत कम, 8.75 फीसदी सालाना की ब्याज दर पर लोन मिला। बीपीएलआर और ग्राहक से ली जानेवाली ब्याज दर का अंतर एग्रीमेंट में बुनियादी तब्दीली न करने पर पूरे लोन की वापसी होने तक बना रहता है। इसीलिए जनवरी 2010 में जहां नए ग्राहकों को 9.25 फीसदी पर फ्लोटिंग होम लोन मिल रहा है, वहीं पुराने से 11.75 फीसदी ब्याज लिया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक की बीपीएलआर अभी 12.75 फीसदी है। इससे एक फीसदी कम ब्याज पुराने से लिया जाएगा क्योंकि एग्रीमेंट इसी पर हुआ था, जबकि नए के एग्रीमेंट में लिखा है कि उसे बीपीएलआर से तीन फीसदी कम ब्याज पर लोन दिया जा रहा है।
इसी तरह बैंक जहां बड़ी कंपनियों को बीपीएलआर से कम ब्याज पर लोन देते हैं, वहीं एकदम छोटी, लघु व मझोली इकाइयों (एमएसएमई) को वे बीपीएलआर से दो-चार फीसदी अधिक दर पर लोन देते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे कहती हैं कि बैंक रेट की नई पद्धति लागू हो जाने से यह भेदभाव या असंतुलन खत्म हो जाएगा क्योंकि इससे कम ब्याज दर बैंक अपने किसी भी ग्राहक को कर्ज नहीं दे सकते।
हालांकि रिजर्व बैंक के नए फैसले के मुताबिक बैंक अपने कर्मचारियों और ग्राहकों को एफडी के एवज में दिए जानेवाले कर्ज पर बेस रेट से कम ब्याज ले सकते हैं। बीपीएलआर को बदलने का कदम रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर दीपक मोहंती की अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिश पर उठाया जा रहा है। बेस रेट की गणना तीन बातों से की जाएगी कि बैंक के लिए जमा पर कितना खर्च आ रहा है, उसको चलाने का  यानी कुल इस्टैबिशमेंट खर्च कितना है और वह कितना लाभ मार्जिन पाना चाहता है। जमा पर खर्च के आकलन का आधार पहले एक साल की एफडी पर ब्याज की दर थी। लेकिन अब यह इससे कम अवधि की एफडी की ब्याज दर भी हो सकती है। बैंक रेट अभी लागू बीपीएलआर की तरह हर बैंक के लिए अलग-अलग होगी। लेकिन बैंकों की आपसी होड़ के चलते इसमें अधिक अंतर नहीं होगा। इससे यह भी होगा कि अभी की तरह बैंक बेहद कम दरों पर टीजर लोन जैसा धंधा नहीं चला सकते क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़कर किसी भी लोन पर ब्याज दर बैंक रेट से कम नहीं हो सकती।
बैंक रेट कितनी होगी, अभी इस पर स्पष्टता नहीं है। जिन बैंकों की कुल जमा में कासाका हिस्सा ज्यादा है, उनकी बैंक रेट 4-5 फीसदी भी हो सकती है। वैसे, पहले माना जा रहा था कि यह दर 8 से 9 फीसदी हो सकती है। बैंक रेट के 1 जुलाई 2010 से लागू होने के बाद बीपीएलआर की व्यवस्था तुरंत नहीं खत्म होगी। बैंक अपने मौजूदा ग्राहकों को विकल्प देंगे कि वे नई या पुरानी व्यवस्था में किसी एक को चुन सकते हैं। असल में 15-20 साल के लोन की शर्तें बदलना काफी कानूनी पचड़े का काम है। हो सकता है कि बैंक इसका बहाना बनाकर पुराने ग्राहकों को नई सहूलियत न दें या फिर इसके लिए अच्छा-खासा प्रीमियम अलग से देने की मांग करें।
www.arthkaam.com से साभार

शुक्रवार, मार्च 05, 2010

एक नज़र इधर भी

गाँव गाँव में फैली मोबाइल क्रांति : एक साहब ने तो highway पर पी.डब्लू.डी. के लगाये बोर्ड पर ही अपनी रीचार्ज कूपन की दुकान का प्रचार कर डाला. 


ध्यान से देखें  पी.डब्लू.डी.ने भी धीरे को धीरें लिखकर हिंदी के साथ मजाक  ही किया है.
क्या जिम्मेदार लोग ध्यान देंगे ?

गुरुवार, मार्च 04, 2010

बल्ले बल्ले ढेर सारी नौकरियां वोह भी बैंक में


नौकरी बहुत सी बस प्रयास करने की जरूरत है 

मंगलवार, मार्च 02, 2010

पास देने का नया अंदाज़


HORN PLEASE का नया संस्करण, लखनऊ इलाहाबाद highway पर ट्रक के पीछे लिखा यह सन्देश 

सोमवार, मार्च 01, 2010

समाज सेवा या अभी तक वेतन न बढ़ाये जाने पर पार्ट टाइम जॉब

जुहू बीच,मुंबई पर इंडिया के  International Bank की टी शर्ट पहने हुआ एक आदमी(शायद कर्मचारी ?) बड़ी तन्मयता से  सफाई करता हुआ
उक्त फोटोग्राफ्स हमारे सहयोगी श्री सी.एन.सिन्हा जी ने अपने मोबाइल से मुंबई प्रवास के दौरान खींची है